‘मुन्नाभाई’ के अंदाज में संजय दत्त ने की सियासत पर बात, पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप का भी किया जिक्र

महात्मा गांधी की जयंती के मौके पर अभिनेता संजय दत्त एक बार फिर अपने चर्चित किरदार मुन्नाभाई की शैली में नजर आए। उन्होंने इस किरदार के अंदाज, भाषा और हाव-भाव का सहारा लेते हुए भारतीय राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर व्यंग्य किया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और महात्मा गांधी का भी संदर्भ आया।

पांच मिनट के लिए प्रधानमंत्री बनने पर क्या बोले संजय दत्त

जानकारी के मुताबिक, संजय दत्त यह बातचीत शेखर सुमन के शो ‘Shekhar Tonite’ में कर रहे थे। गांधी जयंती पर रिलीज हुए इस खास एपिसोड में उनसे एक दिलचस्प सवाल पूछा गया कि अगर उन्हें पांच मिनट के लिए भारत का प्रधानमंत्री बना दिया जाए तो वह क्या कहेंगे।

इसके जवाब में अभिनेता ने अपने मशहूर किरदार मुन्नाभाई को सामने रखा। बातचीत में उन्होंने उसी परिचित अंदाज और बोलचाल की शैली में एक काल्पनिक भाषण पेश किया। इस प्रस्तुति में हास्य के साथ राजनीति से जुड़े कई संदर्भ शामिल थे।

संजय दत्त ने अपने इस अंदाज में सार्वजनिक स्थानों पर राजनीतिक नेताओं की तस्वीरों के प्रदर्शन का भी जिक्र किया। इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी विदेश यात्राओं को लेकर भी व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। हालांकि, पूरी प्रस्तुति का अंदाज गंभीर राजनीतिक बयान के बजाय मनोरंजन और व्यंग्य पर आधारित रहा।

डोनाल्ड ट्रंप और टैरिफ नीति पर भी तंज

शो के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संदर्भ भी सामने आया। संजय दत्त ने ट्रंप की टैरिफ नीतियों को अपनी मुन्नाभाई शैली में शामिल किया और इसी बहाने अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी हल्का-फुल्का कटाक्ष किया।

उन्होंने ट्रंप को संबोधित करते हुए मुन्नाभाई वाले अंदाज में संदेश दिया—“मामू ज्यादा तंटे नहीं पालने का।” यह संवाद उनके किरदार की लोकप्रिय बोलचाल वाली शैली में पेश किया गया, जिससे राजनीतिक संदर्भ को हास्य का रंग मिला।

गांधीजी की ‘गांधीगिरी’ को बताया अलग रास्ता

इस पूरे काल्पनिक भाषण में महात्मा गांधी का संदर्भ खास तौर पर महत्वपूर्ण रहा। संजय दत्त ने टकराव और confrontation के बजाय गांधीजी के विचारों से जुड़ी ‘गांधीगिरी’ को सामने रखा। उनका संदेश यह था कि समस्याओं से निपटने के लिए टकराव की जगह गांधी के सिद्धांतों और अहिंसक रवैये को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

इस बीच, संजय दत्त का मुन्नाभाई वाला रूप दर्शकों के लिए उनके पुराने और लोकप्रिय किरदार की याद भी लेकर आया। फिल्मी किरदार को आधार बनाकर उन्होंने राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों को हास्यपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। खास बात यह है कि पूरी बातचीत में अभिनेता ने अपने जवाब को गंभीर राजनीतिक भाषण की बजाय व्यंग्य और मनोरंजन के रूप में रखा। आगे की चर्चा में इस प्रस्तुति को उसी संदर्भ में देखा गया, जिसमें मुन्नाभाई की शैली के जरिए गांधी के विचारों और मौजूदा राजनीतिक संदर्भों को जोड़ा गया।

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