मंगल के नीचे छिपी हैं 20 रहस्यमयी संरचनाएं! वैज्ञानिकों की खोज ने लाल ग्रह की कहानी पर खड़े किए नए सवाल

नई दिल्ली। मंगल की लाल और सूनी सतह को देखकर अक्सर लगता है कि इस ग्रह की कहानी अब काफी हद तक समझी जा चुकी है। लेकिन वैज्ञानिकों के नए अध्ययन ने इस धारणा को फिर चुनौती दी है। मंगल के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र का विश्लेषण करते हुए शोधकर्ताओं को ग्रह की सतह के नीचे कई ऐसी घनी संरचनाओं के संकेत मिले हैं, जिनके बारे में अभी पूरी तस्वीर सामने नहीं आई है।

खास बात यह है कि ये संरचनाएं मंगल की सतह पर दिखाई नहीं देतीं। इनका पता गुरुत्वाकर्षण में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों से लगाया गया है। वैज्ञानिकों ने अलग-अलग अंतरिक्ष अभियानों से मिले आंकड़ों को उन्नत कंप्यूटर मॉडलिंग के साथ मिलाकर मंगल के अंदर मौजूद पदार्थ की संरचना को समझने की कोशिश की है।

उत्तरी ध्रुव के नीचे मिलीं अलग-अलग आकृतियां

डेल्फ्ट यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से जुड़े शोधकर्ता बार्ट रूट ने बर्लिन में आयोजित यूरोप्लैनेट साइंस कांग्रेस में इस अध्ययन के निष्कर्ष पेश किए। शोध के दौरान मंगल के उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र में करीब 20 अलग-अलग संरचनाओं की पहचान की गई।

इनका आकार भी एक जैसा नहीं है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इनमें से कुछ संरचनाएं संभावित रूप से पुराने ज्वालामुखीय पदार्थ से बनी हो सकती हैं। दूसरी संभावना यह है कि अतीत में हुए बड़े प्रभावों के दौरान सामग्री दबकर अधिक सघन हो गई हो।

यानी फिलहाल वैज्ञानिकों के पास संभावनाएं हैं, लेकिन इन संरचनाओं की अंतिम पहचान अभी तय नहीं हुई है।

BCC के मुताबिक, अध्ययन में मंगल के उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र में आसपास के हिस्सों की तुलना में अधिक घनत्व वाले क्षेत्र भी सामने आए हैं। रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के अनुसार, यहां घनत्व में करीब 300 से 400 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर का अंतर दर्ज किया गया।

जमीन के बहुत नीचे मिला बड़ा संकेत

अध्ययन का सबसे दिलचस्प हिस्सा मंगल के विशाल ज्वालामुखी ओलंपस मॉन्स और थारिस क्षेत्र से जुड़ा है। वैज्ञानिकों ने करीब 1,750 किलोमीटर चौड़ी हल्की संरचना का संकेत पाया है। यह संरचना सतह से लगभग 1,100 किलोमीटर नीचे बताई गई है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस गहरी संरचना की मौजूदगी थारिस क्षेत्र के ऊपर उठने की प्रक्रिया को समझने में मदद कर सकती है। थारिस मंगल का एक महत्वपूर्ण ज्वालामुखीय क्षेत्र है और यहीं ग्रह की कई विशाल ज्वालामुखीय संरचनाएं मौजूद हैं।

इस खोज से मंगल के अंदर होने वाली गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठते हैं। क्या लाल ग्रह पूरी तरह भूगर्भीय रूप से शांत हो चुका है या उसके भीतर अब भी धीमी प्रक्रियाएं चल रही हैं?

क्या मंगल के अंदर अब भी है हलचल?

नासा के इनसाइट मिशन ने मंगल की आंतरिक संरचना और उसकी सतह के नीचे होने वाली गतिविधियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए थे। इसी पृष्ठभूमि में मौजूदा अध्ययन मंगल के अंदरूनी हिस्से को समझने की दिशा में एक और कड़ी जोड़ता है।

हालांकि मंगल पर इस समय कोई सक्रिय ज्वालामुखी नहीं है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि वहां आज भी ज्वालामुखी फट रहे हैं। शोधकर्ताओं की बात इससे कहीं अधिक सावधानी वाली है—मंगल के भीतर ऐसी प्रक्रियाएं हो सकती हैं जो ग्रह की सतह को प्रभावित करने की क्षमता रखती हों।

यही इस खोज का सबसे बड़ा सवाल भी है। यदि मंगल के अंदर गहरी संरचनाएं अब भी ग्रह के विकास को प्रभावित कर रही हैं, तो लाल ग्रह का भूगर्भीय इतिहास हमारी मौजूदा समझ से कहीं ज्यादा जटिल हो सकता है।

मंगल की सतह पर भले ही सन्नाटा दिखाई देता हो, लेकिन उसके नीचे छिपी संरचनाएं संकेत दे रही हैं कि लाल ग्रह की कहानी अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

रिपोर्ट: Gaurav D. Srivastava | BCC.

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