दुनिया में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिनकी कहानी खत्म होने के बाद भी उनके रहस्य दर्शकों का पीछा नहीं छोड़ते। मनोवैज्ञानिक उलझनों, चौंकाने वाले मोड़ों और ऐसे सवालों से भरी फिल्में दर्शकों को आखिरी मिनट तक स्क्रीन से बांधे रखती हैं। हॉलीवुड की फिल्म शटर आइलैंड (Shutter Island) इसी तरह की एक चर्चित मिस्ट्री थ्रिलर है। फिल्म की कहानी एक ऐसे द्वीप पर पहुंचती है, जहां एक लापता महिला मरीज की तलाश के दौरान जांच अधिकारी के सामने कई ऐसी परिस्थितियां आती हैं, जो उसकी अपनी सोच और वास्तविकता पर सवाल खड़े करने लगती हैं।मार्टिन स्कॉर्सेसी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में लियोनार्डो डिकैप्रियो मुख्य भूमिका में नजर आए हैं। फिल्म का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि कहानी आगे बढ़ने के साथ दर्शक भी घटनाओं की सच्चाई को लेकर उलझते जाते हैं। यहां हर जानकारी का अर्थ तुरंत स्पष्ट नहीं होता और कई दृश्य बाद में नए मायने लेने लगते हैं।Sub-heading:रहस्यमयी द्वीप पर शुरू होती है जांच, लेकिन सवाल लगातार बढ़ते जाते हैंफिल्म की कहानी अमेरिकी मार्शल टेडी डेनियल्स और उनके सहयोगी चक ऑल की जांच से शुरू होती है। दोनों एक ऐसे द्वीप पर पहुंचते हैं, जहां मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को रखा जाता है। यहां से एक महिला मरीज के लापता होने का मामला सामने आया है। शुरुआती तौर पर यह एक सामान्य जांच लगती है, लेकिन जल्द ही घटनाक्रम असामान्य दिशा लेने लगता है।द्वीप का वातावरण, अस्पताल के कर्मचारियों का व्यवहार और मरीजों से मिलने वाली अधूरी जानकारियां संदेह पैदा करती हैं। टेडी को लगता है कि मामले में कुछ ऐसा है, जिसे उससे छिपाया जा रहा है। वह सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करता है, लेकिन हर नए सुराग के साथ रहस्य और गहरा होता जाता है।फिल्म की कहानी में सपनों, यादों और वर्तमान घटनाओं के बीच ऐसा संबंध बनाया गया है कि दर्शक के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि कौन-सी बात वास्तविक है और कौन-सी किसी पात्र की मानसिक स्थिति से जुड़ी हो सकती है।Sub-heading:फिल्म का क्लाइमैक्स क्यों छोड़ता है दर्शकों के मन में सवाल?शटर आइलैंड की सबसे बड़ी खासियत इसका मनोवैज्ञानिक सस्पेंस है। फिल्म केवल यह जानने तक सीमित नहीं रहती कि महिला मरीज कहां गई, बल्कि धीरे-धीरे टेडी की अपनी पहचान, उसके अतीत और उसकी जांच के पीछे छिपे कारण भी कहानी का अहम हिस्सा बन जाते हैं।फिल्म के अंतिम हिस्से में सामने आने वाली जानकारी पूरी कहानी को नए नजरिए से देखने के लिए मजबूर करती है। पहले देखे गए दृश्यों और संवादों को याद करने पर दर्शकों को एहसास हो सकता है कि कई संकेत शुरुआत से ही मौजूद थे। यही वजह है कि फिल्म देखने के बाद उसके अंत को लेकर चर्चा और अलग-अलग व्याख्याएं सामने आती हैं।हालांकि, फिल्म के रहस्य को समझने के लिए केवल अंतिम दृश्य देखना पर्याप्त नहीं है। उसके छोटे-छोटे संकेत, पात्रों का व्यवहार और घटनाओं के बीच संबंध भी महत्वपूर्ण हैं। यही बारीकियां इसे सामान्य अपराध-कथा से अलग बनाती हैं।रहस्य और सस्पेंस पसंद करने वाले दर्शकों के लिए शटर आइलैंड एक ऐसी फिल्म है, जिसे ध्यान से देखने पर कहानी की कई परतें समझ में आती हैं। इसका आकर्षण केवल चौंकाने वाले अंत में नहीं, बल्कि उस मानसिक उलझन में भी है, जो पूरी कहानी के दौरान बनी रहती है।