एक अभिनेत्री जिसने अच्छे निर्देशकों के साथ काम किया, फिर भी शादी के बाद काम मिलना मुश्किल होने की बात खुद कही।

एक अभिनेत्री जिसने अच्छे निर्देशकों के साथ काम किया, फिर भी शादी के बाद काम मिलना मुश्किल होने की बात खुद कही।

Soni Razdan Birthday: शादी के बाद अचानक कम हो गया था काम, जानिए आलिया भट्ट की मां सोनी राजदान की अनकही कहानी

मुंबई। बॉलीवुड की दुनिया बाहर से जितनी चमकदार दिखाई देती है, उसके पीछे संघर्ष की कई ऐसी कहानियां छिपी होती हैं, जिनके बारे में आमतौर पर ज्यादा चर्चा नहीं होती। ऐसी ही एक कहानी अभिनेत्री सोनी राजदान की भी है। आज 25 अक्टूबर को सोनी राजदान अपना जन्मदिन मना रही हैं। एक ऐसी अभिनेत्री, जिसने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन उन्हें हमेशा वह पहचान और मौके नहीं मिले, जिनकी वह हकदार महसूस करती थीं।

आमतौर पर सोनी राजदान का नाम सामने आते ही लोगों के मन में महेश भट्ट की पत्नी और आलिया भट्ट की मां की छवि उभरती है। हालांकि, उनकी अपनी पहचान भी काफी पुरानी है। उन्होंने उस दौर में अभिनय की दुनिया में कदम रखा था, जब हिंदी सिनेमा में एक अभिनेत्री के लिए अपनी अलग जगह बनाना आसान नहीं था।

ब्रिटेन में जन्म, मुंबई में बीता बचपन

सोनी राजदान का जन्म 25 अक्टूबर 1956 को ब्रिटेन के बर्मिंघम में हुआ था। उनके पिता नरेंद्र नाथ राजदान कश्मीरी पंडित परिवार से थे, जबकि उनकी मां जर्मन मूल की थीं। सोनी बचपन में ही अपने परिवार के साथ मुंबई आ गई थीं। यहीं उनका पालन-पोषण हुआ और अभिनय के प्रति उनका रुझान बढ़ा।

उनकी दिलचस्पी केवल फिल्मों तक सीमित नहीं थी। उन्होंने थिएटर से भी जुड़ाव रखा और अभिनय की बारीकियां सीखीं। आगे चलकर उन्होंने लंदन के गिल्डहॉल स्कूल ऑफ म्यूजिक एंड ड्रामा में भी प्रशिक्षण लिया। यह सफर बताता है कि अभिनय उनके लिए महज प्रसिद्धि हासिल करने का रास्ता नहीं, बल्कि एक गंभीर पेशा था।

पहली फिल्मों से ही अलग पहचान बनाने की कोशिश

सोनी राजदान ने 1981 में फिल्म ’36 चौरंगी लेन’ से हिंदी सिनेमा में अपनी यात्रा शुरू की। इसके बाद वह ‘मंडी’, ‘सारांश’, ‘त्रिकाल’ और ‘खामोश’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। इन फिल्मों से उन्हें ऐसे निर्देशकों और कलाकारों के साथ काम करने का अवसर मिला, जो अपने समय में सिनेमा को नए ढंग से पेश करने के लिए पहचाने जाते थे।

खबरों के मुताबिक, सोनी राजदान ने अपने करियर के शुरुआती दौर में ही महसूस किया था कि फिल्म इंडस्ट्री में प्रतिभा के साथ-साथ छवि और बाजार की मांग भी काफी मायने रखती है। वह न तो पारंपरिक व्यावसायिक फिल्मों की उस समय की लोकप्रिय नायिकाओं जैसी छवि में पूरी तरह फिट बैठती थीं और न ही उन्हें हर बार अपनी अभिनय क्षमता दिखाने वाले बड़े किरदार मिलते थे।

यही वजह रही कि अच्छे काम और अनुभव के बावजूद उनका करियर लगातार एक जैसी रफ्तार से आगे नहीं बढ़ा।

शादी के बाद बदल गई करियर की तस्वीर

साल 1986 में सोनी राजदान ने फिल्म निर्देशक महेश भट्ट से शादी की। इस रिश्ते के बाद उनकी जिंदगी में परिवार की नई जिम्मेदारियां आईं, लेकिन उनके पेशेवर जीवन में भी एक बड़ा बदलाव देखने को मिला।

सितंबर 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोनी राजदान ने खुद बताया कि शादी के बाद फिल्म इंडस्ट्री में लोगों ने उन्हें लगभग नजरअंदाज करना शुरू कर दिया था। उनके अनुसार, फिल्मी काम के प्रस्ताव काफी कम हो गए थे और उन्हें नियमित अभिनय के लिए टेलीविजन का सहारा लेना पड़ा।

एक कलाकार के लिए यह स्थिति आसान नहीं होती, खासकर तब जब वह पहले ही कई सराहनीय फिल्मों में काम कर चुका हो। हालांकि, सोनी राजदान ने इस दौर को अपने करियर का अंत नहीं बनने दिया। उन्होंने उपलब्ध अवसरों के अनुसार काम जारी रखा और टेलीविजन के जरिए दर्शकों से जुड़ी रहीं।

टेलीविजन ने दोबारा खोले रास्ते

सोनी राजदान ने ‘बुनियाद’, ‘साहिल’ और ‘जुनून’ जैसे टेलीविजन कार्यक्रमों में काम किया। छोटे पर्दे पर उनकी मौजूदगी ने उन्हें लगातार अभिनय करते रहने का अवसर दिया। इस दौर ने यह भी दिखाया कि किसी कलाकार का करियर केवल बड़े पर्दे पर मिलने वाले काम से तय नहीं होता।

वर्षों बाद जब फिल्मों और वेब सीरीज में अलग-अलग तरह की कहानियों के लिए जगह बढ़ी, तब सोनी राजदान को भी नए अवसर मिले। ‘रज्जी’ नहीं, बल्कि फिल्म ‘राजी’ में उन्होंने आलिया भट्ट की मां का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने देखा। इसके अलावा ‘मॉनसून वेडिंग’ और ‘यॉर्स ट्रूली’ जैसी फिल्मों में भी उनके काम को पहचान मिली।

बेटी की सफलता के बीच अपनी पहचान

सोनी राजदान की बेटी आलिया भट्ट आज हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हैं। दूसरी बेटी शाहीन भट्ट लेखन से जुड़ी हैं। परिवार की सफलता के बीच सोनी राजदान का अपना अनुभव भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने ऐसे दौर में काम किया जब महिला कलाकारों के लिए उम्र बढ़ने के साथ अच्छे किरदार हासिल करना एक चुनौती बन जाता था।

उन्होंने अपने साक्षात्कारों में अभिनय को लेकर अपनी निराशा और काम की अनिश्चितता पर खुलकर बात की है। उनकी कहानी को केवल दुख या असफलता के नजरिये से देखना सही नहीं होगा। यह उस कलाकार का सफर भी है, जिसने परिस्थितियां बदलने के बावजूद अपने पेशे से रिश्ता नहीं तोड़ा।

जन्मदिन पर सोनी राजदान की कहानी क्यों है खास?

सोनी राजदान की जिंदगी हमें याद दिलाती है कि किसी कलाकार की पहचान केवल उसके परिवार, रिश्तों या प्रसिद्ध बच्चों से नहीं बनती। उसके पीछे वर्षों की मेहनत, इंतजार और खुद को साबित करने की कोशिश भी होती है।

आज उनके जन्मदिन पर उन्हें केवल आलिया भट्ट की मां के रूप में याद करना उनकी लंबी अभिनय यात्रा को छोटा करके देखने जैसा होगा। सोनी राजदान की कहानी में संघर्ष है, काम की अनिश्चितता है और बदलते समय के साथ खुद को आगे बढ़ाने का प्रयास भी है।

एक ऐसी अभिनेत्री, जिसने हर दौर में अपनी जगह तलाशने की कोशिश की और उम्र के इस पड़ाव पर भी अभिनय तथा निर्देशन की दुनिया में सक्रिय रहने का इरादा जताया है।

संपादकीय नोट: लेख स्वतंत्र शब्दों में लिखा गया है। प्रकाशित करने से पहले नाम, तारीख और फिल्म-संबंधी तथ्यों की पुष्टि कर लें।